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कारोबारी दुश्मनी या फिर कुछ और है गोपाल खेमका मर्डर की कहानी, टाइमलाइन में जानें हर एक बात

 

कारोबारी दुश्मनी या फिर कुछ और है गोपाल खेमका मर्डर की कहानी, टाइमलाइन में जानें हर एक बात

उदयगिरी के फ्लैट नंबर 601 पर छापेमारी कार्रवाई की गई, जहां से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. सिटी एसपी दीक्षा ने कई लोगों को हिरासत में लेने की पुष्टि की है. इस मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. 

















पटना:

पटना के रामगुलाम चौक के पास की सड़कें रात के सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज़ से गूंज उठीं. शहर के जाने-माने कारोबारी गोपाल खेमका अपनी कार से उतरकर घर में दाखिल ही होने वाले थे कि अचानक एक हेलमेट पहने शूटर तेजी से उनकी ओर झपटता है, पिस्तौल सटाता है और नजदीक से गोली दाग देता है. ये सब कुछ कुछ ही सेकंड में खत्म हो जाता है. खेमका का शरीर जमीन पर गिर चुका था, लेकिन पटना की गलियों में डर की लहर दौड़ना अभी शुरू हुई थी. जिस जगह ये मर्डर हुआ, वो पटना पुलिस मुख्यालय और सीएम आवास से महज चंद ही कदमों की दूरी पर है. ऐसे में सवाल उठे कि जब यहां कोई सुरक्षित नहीं, तो बाकी बिहार में बाकी कारोबारियों की जान की क्या कीमत? इस कत्ल की साजिश जिस तरह रची गई उसे जाने इस बात का इल्म हो जाएगा कि बिहार में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं!

4 जुलाई 2025 — खेमका की मौत से पटना में सन्नाटा

उस वक्त पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक पर सब कुछ सामान्य लग रहा था. 2:25 बजे का वक्त, रात के अंधेरे में पटना के कारोबारी गोपाल खेमका अपने घर लौटे. जैसे ही वो अपनी कार से उतरकर दरवाजे की ओर बढ़े, ठीक उसी वक्त हेलमेट पहना एक शख्स उनके पीछे पहुंचा उसने सीधे खेमका की कनपटी पर पिस्तौल सटाई और गोली चला दी. सिर में लगते ही खेमका नीचे गिर पड़े और शूटर मौके से भाग निकला.

सीसीटीवी मिला पहला सुराग — सुपारी किलिंग 

पुलिस ने सबसे पहले इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए. वीडियो में साफ दिखा कि कैसे शूटर ने पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिया. हेलमेट लगाया ताकि पहचान न हो, वो सही समय पर वहां पहुंचा और गोली चलाते ही बिना हड़बड़ाहट तेजी से स्कूटी लेकर भाग गया. इससे पुलिस को यकीन हो गया कि ये कोई रैंडम मर्डर नहीं था, बल्कि सुपारी लेकर की कराई गई हत्या थी.

5 जुलाई — शक की सुई बेऊर जेल की तरफ घूमी

गोपाल खेमका की हत्या के बाद पटना में हड़कंप मच गया. इसके बाद पटना पुलिस ने तुरंत एसआईटी (Special Investigation Team) गठित की. पुलिस ने केस को मिशन मोड में लिया और छानबीन शुरू की. केस की हर एक कड़ी को जोड़ा गया. जांच में पुलिस को पहला बड़ा लिंक मिला —जिसमें कुछ संदिग्ध कॉल डिटेल्स ने उन्हें बेऊर जेल तक पहुंचा दिया। जिसके बाद एसआईटी ने बेऊर जेल में छापेमारी की. यहां से बरामद हुए:

तीन मोबाइल फोन

कई सिम कार्ड

डाटा केबल और संदिग्ध नंबरों की लिस्ट

यानी यह साफ हो गया कि हत्याकांड की प्लानिंग जेल की चारदीवारी के भीतर से ही रची गई थी.

6 जुलाई — गैंगस्टर अजय वर्मा से जेल में पूछताछ

जब पुलिस को शक हुआ कि इस मर्डर केस में बेऊर जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर अजय वर्मा का हाथ हो सकता है. अजय वर्मा पर पहले से ही 28 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिसमें हत्या, अपहरण, डकैती, आर्म्स एक्ट और सुपारी किलिंग तक शामिल हैं. एसटीएफ और पटना पुलिस की टीम ने जेल में जाकर उससे लंबी पूछताछ की. इसी दौरान पता चला कि हो सकता है खेमका की हत्या जमीन विवाद को लेकर हुई हो. जेल से बैठे-बैठे गैंगस्टर ने सुपारी देकर इस मर्डर को अंजाम दिलवाया हो.

7 जुलाई — उमेश की गिरफ्तारी से खुली फाइल, राजा एनकाउंटर में ढेर

उमेश की गिरफ्तारी

7 जुलाई को पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मालसलामी इलाके से मुख्य शूटर उमेश कुमार को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से हत्या में इस्तेमाल पिस्टल और सुपारी के पैसे भी बरामद हुए. पूछताछ में उमेश ने बताया कि उसके घर में गरीबी थी, एक लाख रुपये की सुपारी लेकर ये काम कर दिया.

फ्लैट नंबर 601 से मर्डर का क्या कनेक्शन

पुलिस ने गंगा किनारे से हथियार बरामद किए. उमेश अपने परिवारिक कारणों की वजह से जरूरतमंद था. उसने लगभग एक लाख रुपए के लिए इस घटना को अंजाम दिया था. एसटीएफ और पटना पुलिस ने गिरफ्तार शूटर उमेश कुमार की निशानदेही पर कोतवाली थाने से सटे उदयगिरी अपार्टमेंट में छापेमारी की. फ्लैट नंबर 601 पर छापेमारी कार्रवाई की गई, जहां से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है.

उदयगिरि अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर साउथ 601, केके झुनझुनावाला का है मुंबई में रहते हैं. उस फ्लैट में पिछले दो साल से अशोक साह रहते हैं. साह मूल रूप से नालंदा ज़िला के बिहारशरीफ के रहने वाले है. पहले से लोहा का व्यवसाय करते थे. उनकी पत्नी का निधन हो चुका है, उनकी बेटी दामाद फतुहा में रहते हैं. बेटा पूना में रहता है और अच्छी नौकरी में है. उदयगिरि में किराए पर रहने से पहले ये उसी अपार्टमेंट के बगल में एक लाल कलर की बिल्डिंग के फ्लैट में लगभग 25 साल से किराया पर रह रहे थे.

राजा की मुठभेड़ में मौत

उमेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि घटना के समय विकास उर्फ राजा भी उसके साथ था. उसी रात पुलिस ने विकास को पकड़ने के लिए मालसलामी में घेराबंदी की और मुठभेड़ में विकास मारा गया.

बेटे की भी हत्या हो चुकी है

खेमका परिवार पर यह पहला हमला नहीं था. इससे पहले साल 2018 में गोपाल खेमका के बेटे गुंजन खेमका की भी वैशाली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस केस में आरोपी मस्तु सिंह बाद में मारा गया था. अब पुलिस दोनों केसों को जोड़कर देख रही है. कहीं ऐसा तो नहीं कि खेमका परिवार एक ही गैंग के निशाने पर रहा हो? वैशाली पुलिस भी पुराने केस की फाइलें फिर से खोल रही है.

बेऊर जेल: अपराधियों की नई प्रयोगशाला?

बेऊर जेल का नाम फिर से सवालों के घेरे में है, क्योंकि यह बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल जेल है, लेकिन यहां से गैंगस्टर मोबाइल चला रहे हैं, सुपारी तय कर रहे हैं और जमीन के झगड़े सुलझा रहे हैं. यहां पहले भी अनंत सिंह, रवि गोप, गुलाब यादव, नक्सली अजय कानू जैसे नामी अपराधी रह चुके हैं. पुलिस को यही डर है कि क्या बेऊर जेल अब अपराधियों का नया कमांड सेंटर बन चुका है?.

पटना में व्यापारियों में दहशत का माहौल

पटना में कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या के बाद पटना के व्यापारी सहमे हुए हैं. लोग कह रहे हैं कि अगर खेमका जैसे रसूखदार कारोबारी भी इस शहर में महफूज नहीं, तो हम किस खेत की मूली हैं?"

गोपाल खेमका की हत्या पर सियासत

पटना में हुई इस हत्या पर जमकर सियासत भी हो रही है. विपक्ष कानून-व्यवस्था के मौके पर पहले भी कई बार नीतीश सरकार को घेर चुका है. जैसे ही खेमका का मर्डर हुआ वैसे ही विपक्ष और हमलावर हो गया. जाहिर सी बात है कि इस हत्याकांड पर बिहार की सियासत में भी बवाल मच गया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि नीतीश-बीजेपी ने बिहार को क्राइम कैपिटल बना दिया है. यहां लूट, गोली, हत्या अब ‘नया नॉर्मल' है.

तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के पास व्यापारी मारा जा रहा है, क्या ये जंगलराज नहीं? जब विपक्ष खेमका की हत्या को लेकर हमलावर हो रहा था तब नीतीश कुमार ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. पुलिस को पूरी कार्रवाई के आदेश दिए हैं. डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि अपराधियों पर बुलडोजर चलेगा. जिन पुलिस अफसरों की लापरवाही होगी, उन पर भी कार्रवाई होगी.

DGP की चुनौती — "हम इसे चैलेंज मानकर केस सुलझा रहे हैं"

बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि ये केस उलझा हुआ है, कोई सुराग आसानी से हाथ नहीं आ रहा. लेकिन इसे हम बतौर चुनौती लेकर देख रहे हैं. बहुत जल्द हत्यारों के पूरे नेटवर्क को पकड़ लेंगे. अब पुलिस ने वैशाली पुलिस को भी जांच में जोड़ा है, ताकि बेटे गुंजन खेमका की हत्या और गोपाल खेमका की हत्या दोनों केसों के तार जोड़कर देखें जा सकें.

सबसे बड़ा सवाल — क्या अब बिहार में कारोबारी महफूज हैं?

भले ही अब खेमका मर्डर की हत्या के राज खुलते जा रहे हो लेकिन उनकी मौत पटना की हवाओं में एक सवाल छोड़ गई है कि क्या अब कोई भी व्यापारी बिहार में सुरक्षित है?" आखिर कब तक ये खूनी खेल चलता रहेगा. मोबाइल पर मर्डर ऑर्डर पास करते रहेंगे, तब तक पटना की गलियों में गोलियों की गूंज सुनाई देती रहेगी.

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